जलता धागा

जब जलता जाए धागा,
इक रौशनी के वास्ते
ये देख कर..
मोम ने भी ली नसीहत,
और पिंघलना सीख गया ..

*****✍️गीता

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वक़्त के साँचे में ढलना सीख लो गुफ्तगू का शीरीं लहजा सीख लो छोड़ कर तुम आहनी अपनी रविश मोम की सूरत पिघलना सीख लो कायदा पढ़ना नहीं काफी मियां कायदे से बात करना सीख लो शोख लहरों सा मचलना छोड़ कर शांत सागर सा ठहरना सीख लो दोस्तों से प्यार तो करते सभी दुश्मनों से प्यार करना सीख लो            

Responses

  1. बहुत ही खूबसूरत भाव हैं। कवि ने त्याग और एक दूसरे का साथ देकर संसार में नई रोशनी जगाने की प्रेरणा दी है। काबिलेतारीफ रचना।

    1. सुन्दर समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी ।आपकी प्रेरक समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत आभार 🙏

    1. बहुत सारा धन्यवाद है आपका कमला जी 🙏 कविता की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया,आभार

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