जलन

जलने का ही शौक है तो दीपक की तरह जलो
अंधेरा दूर करदे अपना और अपनो का चलो
प्रेम के मार्ग की दीवार है जलन वह
उन्नति के पादप के नीचे छाँव सा पलों

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

वन डे मातरम

स्वतंत्र हैं हम देश सबका। आते इसमें हम सारे हर जाती हर तबका।।   सोई हुई ये देशभक्ति सिर्फ दो ही दिन क्यूँ होती खड़ी। एक…

Responses

New Report

Close