जिंदगी बेवक्त मशरूफ रहती है

आजकल फुर्सत
नहीं होती है
जिंदगी बेवक्त मशरूफ रहती है…
त्योहार का मौसम है
मगर जाने क्यूं !
होंठों पर खामोशी पसरी रहती है…..
है चारों ओर रिश्तों का
ताना-बाना
पर दिल में मायूसी
फैली रहती है….
रात होती है जब
तो चाँद गगन में आता है
सबकी छतों पर रजत
पिघली रहती है…


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9 Comments

  1. Suman Kumari - November 16, 2020, 6:45 am

    बहुत ही सुन्दर भाव पूर्ण रचना

  2. Geeta kumari - November 16, 2020, 9:07 am

    वाह, मन के भावों को व्यक्त करती हुई बहुत सुंदर कविता, लाजवाब

  3. Rishi Kumar - November 16, 2020, 2:41 pm

    Very nice

  4. Satish Pandey - November 16, 2020, 9:57 pm

    अत्यंत लाजवाब और बेहतरीन अभिव्यक्ति

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 18, 2020, 8:06 am

    सुंदर

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