जिंदगी

जिंदगी थी बस
चंद लम्हों की दास्ता
रह गयी अधूरी फिर भी
अनकही, अनसुनी


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5 Comments

  1. Satish Pandey - February 20, 2021, 12:46 pm

    बहुत सुन्दर पंक्तियां

  2. Geeta kumari - February 20, 2021, 1:58 pm

    ज़िन्दगी पर बहुत सुन्दर लिखा है,बहुत खूब

  3. Pragya Shukla - February 20, 2021, 3:41 pm

    Very nice

  4. Rakesh Saxena - February 20, 2021, 4:19 pm

    बहुत सुंदर वाह

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 20, 2021, 7:40 pm

    खूब

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