जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर

जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर
वह भजन हैं तेरे लिए अमृत तुल(तुल्य) (2 बार गाये)
————————————————————————–
जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर
वह भजन हैं तेरे लिए अमृत तुल(तुल्य) ।।1।।
——————————————————–
हर बात के पीछे एक बात छिपी होती
अगर कर्मफल में आसक्ति छिपी हो तो शांति नहीं मिलती
मन तो पंछी आकाश में उड़ना चाहती,
लेकिन आत्मा ही परमात्मा को ही खोजती
——————————————————–
जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर
वह भजन हैं तेरे लिए अमृत तुल (तुल्य) ।।2।।
——————————————————-
ये प्रकृति जीवों को मार-मारके खाया करती है,
रहम तो जीवों पे सिर्फ परमात्मा ही करता है ।
ये दुनिया एक-ना-एक दिन सबको मारन चाहती है ।
लेकिन ब्रह्म अपने जीवों को बचाता है
—————————————————-
जिसे भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर
वह भजन हैं तेरे लिए अमृत तुल(तुल्य) ।।3।।
कवि विकास कुमार

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

New Report

Close