जीवन की चादर

जिंदगी में मुकाम और भी हैं
मंज़िल एक है पर
रास्ते और भी हैं।
कितनी छोटी है जीवन की चादर
पैर पसारने के आसमान
और भी हैं।
यूंँ नहीं बढ़ते हैं यहाँ फासले
दुश्मनी के मैदान
और भी हैं।
ये हिन्दुस्तान है यहाँ रिश्ते
निभाये जाते हैं।
रकीबों के जहान
और भी हैं।
तंज कसना ही नहीं है
हुनर अपना
पण्डितों(ज्ञानी) के रुआब
और भी हैं।


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11 Comments

  1. Satish Pandey - August 1, 2020, 6:56 pm

    वाह वाह

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 1, 2020, 7:22 pm

    अतिसुंदर

  3. Geeta kumari - August 1, 2020, 8:12 pm

    बहुत सुंदर

  4. Anuj Kaushik - August 1, 2020, 9:11 pm

    सुन्दर रचना

  5. Abhishek kumar - August 4, 2020, 10:18 am

    जीवन की चादर….nice line

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