जीवन की पहेली

अपनों की भीड़ में अकेली सी,
खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी।
किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल,
सुलझानी है खुद ही इस जीवन की पहेली।

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Responses

  1. पाना है अगर मंज़िल तो
    अपना रहनुमा खुद बन
    वो अक्सर भटक गए
    जिन्हें सहारा मिल गया।

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