जीवन की पहेली

अपनों की भीड़ में अकेली सी,
खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी।
किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल,
सुलझानी है खुद ही इस जीवन की पहेली।


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12 Comments

  1. Satish Pandey - August 1, 2020, 10:35 pm

    वाह जी वाह, बहुत खूब

  2. Geeta kumari - August 1, 2020, 10:42 pm

    बहुत बहुत शुक्रिया 🙏

  3. Pragya Shukla - August 1, 2020, 10:52 pm

    पाना है अगर मंज़िल तो
    अपना रहनुमा खुद बन
    वो अक्सर भटक गए
    जिन्हें सहारा मिल गया।

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 1, 2020, 11:31 pm

    Nice

  5. मोहन सिंह मानुष - August 2, 2020, 6:38 am

    बहुत खूब

  6. विकास कुमार - August 2, 2020, 11:17 am

    ग्रेट

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