जी नहीं करता।।

आज सुकून की तलाश करने को जी नहीं करता
तुमसे बात करने को भी जी नहीं करता
जलते हुए चिरागों में रह लिये बहुत,
चिराग दिल के जलाने को जी नहीं करता।।

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Responses

  1. वाह क्या बात है। रचना बहुत सुंदर है।
    अर्शे बाद आए है दोस्तों की महफिल में
    चलो शमा तो जली रात के अंधेरे में।

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