जुआरी हूं

कविता -जुआरी हूं
———————–
हां जुआरी हूं,
एक बार जुआ और खेलने दो,
जो बचा है मेरे पास अब
दांव पर लगाकर खेलूंगा,
बिक गया सब कुछ मेरा
अब उधार ले कर खेलूंगा,
सभी अपनों के आगे हाथ फैला –
जाऊंगा उसी महफिल में,
सबसे अपना हाल कहूंगा,
कोई मुझ पर तरस खाएगा
उधार पत्ते की चाल फेक दूंगा,
फटे पुराने उजले कपड़ों में,
बदहाली तंगी के जीवन में ,
कभी खेल से भागूँगा नहीं,
हो कर्ज मुसीबत लाख मुझ पर,
सुन! समझ ईश्वर तुझसे-
वरदान कभी भी मांगूंगा नहीं,
मरूंगा उस पथ पर भूख से बेहाल
पर मुकाम पाए बिना लौटूंगा नहीं
स्वाभिमान लिए अपना
खेल खेलता रहूँगा
देख बड़ी चाल को,
चाहे हाथ पांव कापें मेरे,
पर खेल से उठूंगा नहीं।
ना भविष्य की चिंता
ना भूत की
बस दृढ़ ध्यान लगाए वर्तमान पर
समझ रख चाल पत्तों की
चाल पर चाल चलाए जाऊंगा|
आज नहीं तो कल सौ बार हार कर,
एक दिन जीत जाऊंगा|
कोई खेले न मेरी तरह
जुआरी संग पक्का नशेड़ी हूं,
मैं समझदारों की नजर में,
जुआरी नहीं जुआरियों का कोच हूं,
जिसे सब कुछ गवाने की हिम्मत हो,
वो आए आज मेरी महफिल में
सूरज ढलने से पहले वह इनाम पाएगा,
सच वो आज नहीं तो कल जीत जाएगा|
हार मिले तो क्या हुआ,
सीख रहा तो क्या हुआ
हुआ तब जब कुछ किया नहीं,
हार के डर से महफिल में आया नहीं|
मिले जख्म जब दर्द का एहसास होगा,
किसी और को बताने में लक्ष्य आसान होगा,
यह समझ कर ,आ इस बार मेरी महफिल में,
कुछ सीख ले-
कुछ को सिखाने में निपुण हो जाएगा,
————————————————-
**✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’—


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

भोजपुरी चइता गीत- हरी हरी बलिया

तभी सार्थक है लिखना

घिस-घिस रेत बनते हो

अनुभव सिखायेगा

5 Comments

  1. Geeta kumari - December 27, 2020, 8:29 pm

    रचना के माध्यम से कवि ने ये बताने की कोशिश की है कि जुआ, जुआ खेलने वाले को ही ले डूबता है। अति सुन्दर भाव एवम्
    शानदार प्रस्तुति

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 27, 2020, 9:11 pm

    अतिसुंदर

  3. Sandeep Kala - December 27, 2020, 9:18 pm

    Very good

  4. Satish Pandey - December 27, 2020, 10:16 pm

    बहुत खूब, बहुत शानदार कविता

  5. Pragya Shukla - December 30, 2020, 5:25 pm

    ही लाजवाब लेखनी है आपकी
    आपने बड़े ही सहज रूप से बता दिया है जुआ खेलने का दुष्परिणाम क्या होता है

Leave a Reply