जुबां जो कह नहीं सकती..

जुबां जो कह नहीं सकती
आंखें वो राज़ कहती हैं।
दिल में जो कुछ भी चलता है
धड़कनें आवाज करती हैं ।
लगाए लाख भी पहरे
दिलों पर चाहे जमाना,
मोहब्बत तोड़कर पहरे
दिल को आजाद करती है।
मिले ना दुनिया की शोहरत
सच्चा दिलदार मिल जाए।
जहां में प्यार की दौलत ही
सच में आबाद करती है।
किसी को टूट कर चाहो
अगर वो छोड़ दे दामन,
एक तरफा मोहब्बत ही ‘प्रज्ञा’
जलाकर खाक करती है।


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11 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 8, 2020, 10:47 pm

    बड़ी सुंदर रचना

  2. Panna - June 9, 2020, 8:08 am

    nice

  3. देवेश साखरे 'देव' - June 9, 2020, 12:06 pm

    बहुत खूब

  4. Abhishek kumar - July 12, 2020, 11:50 pm

    Good

  5. प्रतिमा चौधरी - September 26, 2020, 1:14 pm

    बहुत बढ़िया

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