जुल्म से कांपी इंसानियत

जब जब ज़ुल्म की जलजले इस ज़मीन पे फन फैलाया।
तब तब इन्सान की इंसानियत खून की आँसू ही रोया।।


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6 Comments

  1. Satish Pandey - September 28, 2020, 9:30 pm

    वाह, “जब जब ज़ुल्म की जलजले इस” में अनुप्रास से अलंकृत पंक्तियाँ सहज की आकर्षित कर रही हैं।

  2. Geeta kumari - September 28, 2020, 10:03 pm

    बहुत ख़ूब। अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग।

  3. Suman Kumari - September 29, 2020, 12:20 am

    बहुत ही सुन्दर

  4. प्रतिमा चौधरी - September 29, 2020, 12:36 am

    बहुत सुंदर भाव

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 29, 2020, 7:15 am

    बहुत खूब

  6. मोहन सिंह मानुष - September 29, 2020, 1:42 pm

    सुंदर अभिव्यक्ति

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