जुल्म से कांपी इंसानियत

जब जब ज़ुल्म की जलजले इस ज़मीन पे फन फैलाया।
तब तब इन्सान की इंसानियत खून की आँसू ही रोया।।

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Responses

  1. वाह, “जब जब ज़ुल्म की जलजले इस” में अनुप्रास से अलंकृत पंक्तियाँ सहज की आकर्षित कर रही हैं।

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