जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में,

जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में,
आज उस खुदा ने उन्हें ज़मी का मुरीद कर दिया॥
– राही

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