जो जान लेता है..

जो हमें जानता ही नहीं,
उसे हक है, हमें
अच्छा,बुरा कुछ भी क्रहने का
पर जो हमें जान लेता है,
वो हम पर जान देता है ..

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Responses

  1. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ।
    सच में जो करीब हैं
    उन्हें ही हमारी अच्छाइयां नजर आती हैं
    दूर जो हैं, उनकी कही हुई बातें कहाँ परेशा कर पाती हैं

    1. कविता में दूर या पास का कोई जिक्र नहीं है मैम सुमन कुमारी जी ।
      बात जानने की और ना जानने की कही गई है ।आपने शायद ध्यान से पढ़ा नहीं या फिर समझा ही नहीं।

  2. कवि गीता जी की यह एक बेहतरीन रचना है। एक तरफ अनुप्रास का अलंकरण, दूसरी ओर यमक की छटा, भाव भी अतिउत्तम, शिल्प भी लाजवाब।
    सधे हुए शब्द, सधी हुई पंक्तियाँ, सुन्दर प्रस्तुतिकरण, सब कुछ उच्चस्तरीय है। यह प्रतिभा सदैव चमकती रहे।

  3. इस सुन्दर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी ।
    इससे ख़ूबसूरत समीक्षा तो इन पंक्तियों की हो ही नहीं सकती थी ।
    आपकी समीक्षा शक्ति को सलाम और बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  4. सही कहा आपने गीता जी अनजान व्यक्तियों द्वारा उठाया गया उपहार हमारे ह्रदय को नहीं चुभता
    और जब कोई हमारी अच्छाइयों गुणों को तथा हमारी सीरत को जान जाता है तो वह वाकई में हम पर जान देता है आपने जिस प्रकार यमक अलंकार का प्रयोग किया है उसने आपकी कविता में चार चांद लग जाते हैं

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