जो भी सृजन हो धर्म से हो

ब्रह्मचर्य, हाँ ठीक है कहना,
लेकिन क्या भारतमाता के
सभी पुत्र ब्रह्मचारी बन
सृजन से दूर चले जाएँ।
नहीं – नहीं नयी पीढ़ी का
सृजन युवा रक्त से हो,
इसलिए विरक्ति की नहीं जरुरत
सृजन की ओर अनुरक्त रहो.
हाँ सृजन की राह धर्म पर हो
सद्सृजन हो, कुकर्म न हो।
दैवी प्रकृति है वरदानी
जो भी सृजन हो धर्म से हो।


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9 Comments

  1. vivek singhal - August 4, 2020, 4:45 pm

    Good

  2. vivek singhal - August 4, 2020, 5:23 pm

    Ati sundar,
    Jo bhi shrijan ho dharm se ho

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 5, 2020, 6:57 pm

    बहुत खूब

  4. Kumar Piyush - August 13, 2020, 5:26 pm

    nice

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