झूला

चाँद पर लगाया है झूला देख न जल जाये कोई,
मुझे देखा देख कहीं घर से न निकल जाये कोई,

ये बादलों की चादर ये आसमानी घना अन्धेरा,
डर भी लगता है मुझको के निगल न जाये कोई,

रंग तो देखे ज़माने में पर दिल को भाया न कोई,
पर रंगों भरी रागिनी देखके फिसल न जाए कोई।।

राही अंजाना

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8 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 9:27 am

    Good one

  2. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 9:28 am

    अच्छी कविता

  3. देवेश साखरे 'देव' - September 10, 2019, 9:31 am

    वाह

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 10, 2019, 9:33 am

    वाह बहुत सुंदर

  5. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 12:09 pm

    Romanchak h

  6. Poonam singh - September 10, 2019, 1:09 pm

    Good one

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