टक्कर

हम भी एक महल बनाए है
उलफत के सरज़मीं पे
महफूज रहे मेरा महल
इसीलिए वफा की चादर
ओढा़या है हमने महल पे ।
देखें ज़ुल्म में कितनी ताक़त है
जो महल को हीला दे
चाहत की जंजीर से
इसे बांधा है हमने ।
आजमाइश होगी एक न एक दिन
किसकी होगी जीत
यह फैसला हो जाएगा
इन्तजार है हमें उस घड़ी की
जिस दिन कयामत
मेरे कायनात से टकराएगी।

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