ठंड में मैं आग पीना चाहता हूँ

मैं कभी तो खूब रोना चाहता हूँ,
ठंड में मैं आग पीना चाहता हूँ,
रात भर अकड़ा हुआ बेजान मत समझो,
अभी तो और जीना चाहता हूँ।
पैदा हुआ कैसे कहाँ कब क्या
न जाने,
बस इसी फुटपाथ को पहचानता हूँ।
माँ-बाप क्या परिवार क्या है क्या पता,
मैं अकेली रात को ही जानता हूँ।
कौन कब मुझको यहां पर रख गया,
कौन हूँ खुद भी नहीं पहचानता हूँ।
मैं कभी तो खूब रोना चाहता हूँ,
ठंड में मैं आग पीना चाहता हूँ,


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8 Comments

  1. Devi Kamla - December 25, 2020, 3:25 pm

    बहुत ही बेहतरीन पंक्तियाँ

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 25, 2020, 3:25 pm

    बहुत खूब
    अनाथों की ज़िन्दगी का यथार्थ चित्रण

  3. MS Lohaghat - December 25, 2020, 3:55 pm

    बहुत खूब बहुत बढ़िया

  4. Geeta kumari - December 25, 2020, 4:15 pm

    अनाथ बच्चे की तन्हा ज़िन्दगी का और ज़िन्दगी से जूझने का वास्तविक चित्रण । बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति

  5. Sandeep Kala - December 25, 2020, 4:38 pm

    लाजबाब सर

  6. Suman Kumari - December 25, 2020, 11:06 pm

    बेहतरीन

  7. Rishi Kumar - December 26, 2020, 7:07 pm

    वाह सर

  8. Pragya Shukla - December 27, 2020, 7:34 pm

    बेसहारा अनाथ बच्चे की कहानी बयां करती मार्मिक रचना

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