डर के साये में

डर के साये में खुद को दबाये बेटियाँ रहती हैं,

बहुत कुछ है जो खुद ही छुपाये बेटियाँ रहती हैं,

अपने को अपनों से पल-पल बचाये बेटियाँ रहती हैं,

होठों को भला किस कदर सिलाए बेटियाँ रहती हैं,

कहीं कन्धे से कन्धा खुल के सटाये बेटियाँ रहती हैं,

कहीँ नज़रों को सहसा क्यों झुकाये बेटियाँ रहती हैं॥

– राही (अंजाना)

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

बेटियाँ

पैदा होने से पहले मिटा दी जाएँगी बेटियाँ, बिन कुछ पूछे ही सुला दी जाएँगी बेटियाँ, गर समय रहते नहीं बचाई जाएँगी बेटियाँ, तो भूख…

Responses

New Report

Close