डर

डर अब अँधेरी रातों से नहीं लगता,
क्योंकि रातें अपने आगोश में सुला लेती है।
डर तो रौशनी की किरणों से लगता है,
क्योंकि रौशनी सब कुछ साफ़ साफ़ दिखा देती है।


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6 Comments

  1. राही अंजाना - June 30, 2018, 3:53 pm

    Shi

  2. Neha - July 1, 2018, 10:48 am

    Very nice

  3. bhoomipatelvineeta - July 1, 2018, 10:58 am

    Thank u

  4. ज्योति कुमार - July 24, 2018, 9:52 pm

    Waah

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 12:34 am

    वाह बहुत सुंदर रचना

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