तब

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तबकी बात और है,
ना करो तबकी बातें,
थे तब भी लेकिन,
जख्म हँसते ना थे।
होंगे सांप तब भी,
यकीनन आस्तीनों में,
रहते थे खामोश,
तब ये डसते ना थे ।।

Copyright@ नील पदम्

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10 Comments

  1. Abhishek kumar - November 28, 2019, 9:40 am

    Nice

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 28, 2019, 11:46 am

    सुंदर

  3. देवेश साखरे 'देव' - November 28, 2019, 12:38 pm

    वाह

  4. NIMISHA SINGHAL - November 29, 2019, 7:54 am

    Wah

  5. nitu kandera - December 2, 2019, 7:49 am

    Wah

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