तभी सार्थक है लिखना

मेरे लिखे से उजाला हो जाये
कुछ भी नहीं तो
उठें चिंगारिया,
किसी को जिन्दगी का
रास्ता मिल जाये।
अंधेरे में भटकता
अगर मन हो किसी का
मेरी दो पंक्ति उसको
रास्ता दे आये।
तभी सार्थक है लिखना
किसी काम आये,
मेरी पहचान छोड़ो
जमाना लाभ पाये।
देख अदना सा कवि हूँ
मगर संदेश मेरा,
अडिग रह राह अपनी,
न बन चिंता का डेरा।
साथ लाये नहीं कुछ
साथ जाये नहीं कुछ
बताकर सब गए हैं
पुराने कवि यही सच।
किसी को ठेस देने
कलम मेरी उठे मत
शुद्ध साहित्य सेवा
रहे केवल मेरा पथ।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. मेरे लिखे से उजाला हो जाये
    कुछ भी नहीं तो
    उठें चिंगारिया,
    किसी को जिन्दगी का
    रास्ता मिल जाये।
    ______’________एक सच्चे कवि हृदय की सच्ची भावनाओं को
    व्यक्त करती हुई कवि सतीश जी की अत्यंत श्रेष्ठ रचना…उत्तम शिल्प उम्दा लेखन

  2. मेरे लिखे से उजाला हो जाये
    कुछ भी नहीं तो
    उठें चिंगारिया,
    किसी को जिन्दगी का
    रास्ता मिल जाये।
    अंधेरे में भटकता
    अगर मन हो किसी का
    मेरी दो पंक्ति उसको
    रास्ता दे आये।

    आपकी लेखनी से वाकई में मन को प्रकाश और राहगीर को रास्ता मिलता है

New Report

Close