तरकश

अभी और भी तीर हैं,तरकश में तेरे बाक़ी,
हार से पहले रोता क्यूं है।
इस युद्ध में तेरे विरूद्ध हैं कुछ लोग,
कुछ लोग तेरे साथ भी हैं,।
पलकें भिगोता क्यूं है।


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9 Comments

  1. Pragya Shukla - August 1, 2020, 10:41 pm

    हिम्मत बढ़ाती हुई रचना

  2. Satish Pandey - August 1, 2020, 11:19 pm

    वाह वाह बहुत खूब

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 1, 2020, 11:40 pm

    Nice

  4. मोहन सिंह मानुष - August 2, 2020, 6:36 am

    बहुत ही उम्दा

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