तलाश तेरी है

तलाश तेरी है
मेरा पता चले

ये नाम मेरा
क्यूं अनजान लगे
ये काम मेरा
इक बोझसा लगे

साथी जो बने
टिक ना सके
चाहा था जिन्हें
कबके ओझल हुए

दिन हो एकसा
यही आस लिए
बीती जा रही
सांस बिन रुके

नज़रों पे कब्जा
कहां हुआ कभी
शिकायत जब हुई
अपनी थी कमी

जुंबा है बेलगाम
नज़रें खुली अपलक
अपनी ही इन्द्रियां
गैर की झलक

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. तलाश तेरी है
    मेरा पता चले…
    ________ जीवन के यथार्थ दर्शन कराती हुई कवि राजीव रंजन जी की बहुत सुंदर रचना, अति सुंदर भावाभिव्यक्ति

New Report

Close