तिलक तुम्हारी माया नगरी

तिलक तुम्हारी माया नगरी बदनाम हो रही है।
नशा नग्नता गुण्डागर्दी अब सरेआम हो रही है।।
चोरों का आतंक नगर में -डर नहीं लगता ।
ठगों के गिरोह डगर में – डर नहीं लगता।।
ड्रग्स का सेवन दिन रात करे पर – डर नहीं लगता।
खरीद फरोख्त दिन रात करे पर – डर नहीं लगता।।
अर्द्धनग्न होकर नित रहना- डर नहीं लगता।
रोज रोज नव मित्र बदलना – डर नहीं लगता।।
डर तो तब लागे जब जय जय श्री राम हो रही है।
तिलक तुम्हारी माया नगरी बदनाम हो रही है।।


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14 Comments

  1. Anuj Kaushik - September 25, 2020, 3:20 pm

    अति सुन्दर प्रस्तुति

  2. Geeta kumari - September 25, 2020, 4:25 pm

    यथार्थ परक अभिव्यक्ति

  3. MS Lohaghat - September 25, 2020, 5:22 pm

    बहुत खूब

  4. प्रतिमा चौधरी - September 25, 2020, 5:47 pm

    लाजवाब लेखनी 👏👏

  5. Satish Pandey - September 25, 2020, 6:14 pm

    वाह, अतिसुन्दर

  6. Praduman Amit - September 25, 2020, 7:04 pm

    अति उत्तम रचना।

  7. Suman Kumari - September 25, 2020, 8:55 pm

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

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