तुझसे बिछड़ के

तुझसे बिछड़ के

जिंदगी कुछ इस तरह से गुजरी है,
न कोई राह-ए-सफ़र, न हम सया साथ चलता है,

इतना तन्हा हुआ मैं तेरे जाने के बाद,
ना अपना, ना कोई पर्य साथ चलता है।

जिंदगी अपनी कुछ इस तरह से गुजरी है,
न कोई राह-ए-सफ़र, न हम सया साथ चलता है,

अब तो फ़िज़ा भी रूठी रूठी सी लगती है।
न कोई महफ़िल, न मौसम-ए-बहार,
बस गामो का कफिला साथ चलता है।

जिंदगी कुछ इस तरह से गुजरी है,
यादों का सिलसिला, तनहाई का करवा साथ चलता है।

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