तुझे शर्म नहीं आई

नमस्कार दोस्तों आप सब देख रहे हैं आज कल बच्चियों के साथ कुछ बहेशी दरिन्दे जो कर रहे हैं दो शब्द आज लिखने पर मजबूर हो गया

ऐसे कुकर्म करते जरा भी शर्म क्या तुझे नहीं आई।
उसे देख तुझे अपनी बेटी याद क्या तुझे नहीं आई।।
“” “” ”

चिखती चिल्लाती तो कभी दर्द से कराहती भी होगी।
उस मासूम पर जरा सा भी रहेम क्या तुझे नहीं आई।।
” “” “”

वो तुझे चाचा भईया या पिता समझ कर आई होगी ।
उसकी आंखों में ये रिश्ते भी नजर क्या तुझे नहीं आई।।
“” “” “”

किस कदर घुट घुट कर तोड़ा होगा दम उसने अपना।
हवस बुझाते हुए इन्सानियत याद क्या तुझे नहीं आई।।
“” “” “”

ऐसे कूकर्म करते जरा भी शर्म क्या तुझे नहीं आई।।।

” रहस्य ” देवरिया

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

ठहरो-ठहरो इनको रोको, ये तो बहसी-दरिन्दें हैं ।

ठहरो-ठहरो इनको रोको, ये तो बहसी-दरिन्दें हैं । अगर इसे अभी छोड़ डालोगे. तो आगे इसका परिणाम बुरा भुगतोगे ।। ठहरो-ठहरो इनको रोको, ये तो…

Responses

  1. बहुत ही मार्मिक रचना सच में ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए

New Report

Close