तुम्हारा ख़याल आया हो

कोई ख्वाहिश कहाँ
कोई पछतावा भी नहीं
पतझङ-सी है वीरानी
बसंत आया ही नहीं
दूर तक फैला है सूनापन
जैसे शून्य निकल आया हो
हाँ, कुछ इस तरह
तेरा ख़याल आया हो ।
काली निशा की छाया में
अर्णव में खामोशी छायी है
पर उसके तलचर में
सुनामी की तरंगों ने
जैसे पनाह पायी हो
हाँ, कुछ इस तरह
तेरा खयाल आया हो ।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

सूनापन

आकर अंधेरों में डराता है सूनापन मुझे सहारा चाहिए चिल्लाता है सूनापन एक ऐसा सहारा जो हर कदम पर साथ रहे मैं जब भी डगमगाऊ…

Responses

New Report

Close