तुम्हें ज़िन्दगी के उजाले

तुम्हें ज़िन्दगी के उजाले

तुम्हें ज़िन्दगी के उजाले मुबारक
अंधेरे हमें आज रास आ गए हैं
तुम्हें पा के हम ख़ुद से दूर हो गए थे
तुम्हें छोड़कर अपने पास आ गए हैं
तुम्हें ज़िन्दगी के…

तुम्हारी वफ़ा से शिक़ायत नहीं है
निभाना तो कोई रवायत नहीं है
जहाँ तक क़दम आ सके आ गए हैं
अंधेरे हमें आज…
तुम्हें ज़िन्दगी के…

चमन से चले हैं ये इल्ज़ाम लेकर
बहुत जी लिए हम तेरा नाम लेकर
मुरादों की मंज़िल से दूर आ गए हैं
अंधेरे हमें आज…
तुम्हें ज़िन्दगी के…

– गुलज़ार

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2 Comments

  1. Neelam Tyagi - September 24, 2016, 12:30 pm

    Nice

  2. Kavi Manohar - September 24, 2016, 3:43 pm

    nice one

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