तेरी मुस्कुराहट

कुछ तो खास है उसकी मुस्कुराहट में,
जब भी देखता हूं, दिल मिजाज़ करने लगता है।
लाख समझा लूं मैं इस दिल को मगर कमबख्त,
तुझे देखकर बेवजह ही धड़कने लगता है।
शाम की चादर जैसे ही आसमां ओढ़ लेता है,
तब मेरा दिल भी धड़कने के बहाने ढूंढ लेता है,
न जाने कौन अजनबी है वो,
जब भी उसे देखता हूं, अपना सा लगता है।
कुछ तो खास है उसकी मुस्कुराहट में,
जब भी देखता हूं, दिल मिजाज़ करने लगता है।
तू है तो अजनबी ही, लेकिन फिर भी……
तुझे अजनबी कहने से डर लगता है।
तू और सिर्फ तू ही रहे मेरे पास,
बस यही दुआ मेरा दिल ये करता है।
कुछ तो खास है उसकी मुस्कुराहट में,
जब भी देखता हूं, दिल मिजाज़ करने लगता है।
…. शिवम्

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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