तेरे दर्द ने हमें इस तरह बेगाना किया ।

तेरे दर्द ने हमें इस तरह बेगाना किया ।
तुझे भूलाके हमने खूद को याद किया ।।

अपनी पहचान भूलाके हमने साथ प्यार का सपना देखा ।
कमबख्त! तुने मुफलिस समझे मेरा प्रेम-प्रस्ताव अस्वीकार किया ।।

खेले तुमने मेरे जज्बात से झू़ठी मुहब्बत किया तुमने ।
रंगीन-सी जिन्दगी में आखिर तुमने अपनी बेवफाई की रंग घोली ।।

सीधे-सीदे जिन्दगी जी रहें थे हम, खूद में मस्त रहते थे हम ।।
तुझसे मुलाकात क्या हुई? कमबख्त! तुने ऐसे-ही जिन्दगी लूट ली मेरी ।।

बेवफा, संगदिल, बेरहम-बेह्या हम किसी को बद्दुआ नहीं देते, तो तुझे क्या खाक! देंगे?
दुआ ही दुआ लगें यहीं दुआ है तुम्हें ।।

तु जीले अपनी जिन्दगी खूद के उसूलों से गम नहीं इसका मुझे ।
तु गैर की जहां में आबाद रहें, यहीं दुआ हैं तुम्हें ।।

जहां न कह सके तुझे ओ! बेवफा तु वफा की दुनिया में सलामत रहें ।
न लगे जहां की कोई बुरी नजर तुझे, ईश्वर तुझे हर बला से बचायें रखें ।।

तु जिये अपनी जिन्दगी अपनी जहां में अपने लोगों के साथ ।
गम नहीं इसका मुझे, तू जहाँ रहें अपने लोगों के साथ मस्त रहें ।।
— विकास कुमार


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3 Comments

  1. Pragya Shukla - August 4, 2020, 10:59 am

    👌👌

  2. Satish Pandey - August 4, 2020, 2:52 pm

    भूलाक़े, भुल, खूद
    प्लीज सुधार आवश्यक है

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 5, 2020, 7:23 pm

    नापसन्द को पसन्द करें
    ऐसी मुझ में शक्ति कहाँ?

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