तेरे शहर में

यूं तो हंसीनों की कमी नहीं तेरे शहर में।
एक तुझ पे ही दिल आया पहली नज़र में।

और कोई नजर आता नहीं, एक तेरे सिवा,
इंकार नहीं, प्यार घोलकर पिला दो ज़हर में।

रहने को तो हम हुस्नों के बीच भी रहे हैं,
ना थी वह बात, उन हुस्नों के असर में।

नहीं कहता चांद तारे कदमों में बिछा दूंगा,
सजाकर रखूंगा ताउम्र तुम्हें दिल के घर में।

दिल की गहराई में ‘देव’ उतर कर तो देख,
नहीं मिलेगा ऐसा सैलाब गहरे समंदर में।

देवेश साखरे ‘देव’

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

10 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - October 4, 2019, 12:39 pm

    Wah

  2. Poonam singh - October 4, 2019, 4:35 pm

    Bahut khub

  3. Deovrat Sharma - October 4, 2019, 5:54 pm

    सुंदर कृति …

  4. राही अंजाना - October 4, 2019, 10:08 pm

    वाह

Leave a Reply