तो क्या होता..

‘सोचता हूँ तो हर वजह ही बेवजह सी लगे,
मेरी साँसों से मेरे दिल का वास्ता न होता तो क्या होता…?
मुझ पर से गुज़र कर न जाने कितने चले गए,
मैं औरो के मक़ाम का रास्ता न होता तो क्या होता..?’

– प्रयाग

मायने :
मक़ाम – ठहरने/रुकने की जगह

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