दया धरम की राह छोड़ो मत

इस तरह बम पटाखे फोड़ो मत,
कान डरते हैं, कान फोड़ो मत।
निर्दयी से करो किनारा तुम
दया धरम की राह छोड़ो मत।
मिलो ऐसे मिलो, दूध में बतासे से
कच्चे धागों में खुद को जोड़ो मत।

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Responses

  1. रौद्र रस से भरी हुई रचना, कवि सतीश जी की किसी पर क्रोध करती हुई रचना है… भावों की अभिव्यक्ति को सुचारू रूप से प्रस्तुत किया गया है..

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