दया धरम की राह छोड़ो मत

इस तरह बम पटाखे फोड़ो मत,
कान डरते हैं, कान फोड़ो मत।
निर्दयी से करो किनारा तुम
दया धरम की राह छोड़ो मत।
मिलो ऐसे मिलो, दूध में बतासे से
कच्चे धागों में खुद को जोड़ो मत।


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5 Comments

  1. Piyush Joshi - October 17, 2020, 9:22 pm

    वाह वाह बहुत खूब

  2. Suman Kumari - October 17, 2020, 10:40 pm

    सुन्दर

  3. Geeta kumari - October 18, 2020, 5:46 am

    रौद्र रस से भरी हुई रचना, कवि सतीश जी की किसी पर क्रोध करती हुई रचना है… भावों की अभिव्यक्ति को सुचारू रूप से प्रस्तुत किया गया है..

  4. Devi Kamla - October 18, 2020, 7:32 am

    वाह बहुत खूब लिखा है

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 18, 2020, 8:20 pm

    अतिसुंदर

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