दर्द का जो स्वाद है

दर्द का जो स्वाद है,
उससे दिल आबाद है,
मुफ्त है जग में,
खुदगर्जीया !

मक्कारियां सरेआम है,
दर्द का जो स्वाद है,
उससे दिल आबाद है।

मदहोशियों का माहौल हैं
बहरूपियों की यहां फौज हैं,
पराया यहां,
किस -किस को कहें,
अपनों की जरा खोज है,

बैचेनियां, तन्हाईयां,
बदनामियां!
आजाद हैं,
दर्द का जो स्वाद है,
उससे दिल आबाद है।


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4 Comments

  1. Rishi Kumar - October 11, 2020, 10:37 am

    लाजवाब✍✍✍ 👌👌👌

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 11, 2020, 11:46 am

    बहुत खूब

  3. Pragya Shukla - October 11, 2020, 12:18 pm

    Nice

  4. मोहन सिंह मानुष - October 12, 2020, 9:40 am

    आप सभी का हार्दिक धन्यवाद 🙏🙏

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