दर्द

लिपट कर अपनी माँ से हर दर्द भूल जाता हूँ,
इस जन्नत में दुनियाँ का नर्क भूल जाता हूँ।।
राही अंजाना


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15 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 18, 2019, 6:39 pm

    सच
    सुंदर

  2. Neha - November 18, 2019, 8:11 pm

    Waah

  3. nitu kandera - November 18, 2019, 11:28 pm

    wah

  4. देवेश साखरे 'देव' - November 19, 2019, 10:36 am

    वाह

  5. NIMISHA SINGHAL - November 20, 2019, 6:16 pm

    Wah

  6. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:27 pm

    सच कहा

  7. Neha - November 24, 2019, 7:53 pm

    Wah

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