दिल की गलियाँ…

आज बहुत दिनों बाद आई हूँ
तुम्हारे दिल की गलियों में..
सफर करने को
जरा संभाल कर रखना
अपनी धड़कनों को
मुझे देखकर कहीं मचल ना पड़ें…
यूं नजरों से देखने की कोशिश ना करो मुझे
आंखों को बंद करके बस महसूस करो मुझे..
तुम्हारी बंद पलकों में नजर आऊंगी
आंखें खोल कर देखना चाहोगे अगर
तो गुम हो जाऊंगी…
तभी तो आज बहुत दिनों बाद आई हूँ
तुम्हारे दिल की गलियों में सफर करने को…

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Responses

  1. आंखें खोल कर देखना चाहोगे तो गुम हो जाऊंगी । आपकी सोच ने तो निशब्द कर दिया सुन्दर पंक्तियां

  2. आंखें खोल कर देखोगे तो गुम हो जाऊंगी आपकी रचना ने निशब्द कर दिया। सुन्दर पंक्तियां

  3. कितना प्रेमपूण लिखती हो आप
    आपकी सोंच को सलाम है
    हैड्स अॉफ यू

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