दिल

दिल जब लगता अच्छा बुरा कहां दिखता,
तड़प आह दर्द को कहां वह गौर करता।
आंखों आंखों से प्यार का इजहार करके,
खुद को हिर रांझा जैसा मशीहा समझता।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 15, 2020, 7:20 pm

    Nice

  2. Priya Choudhary - June 16, 2020, 8:29 am

    Good

  3. Pragya Shukla - June 18, 2020, 10:23 am

    👌

  4. Abhishek kumar - July 10, 2020, 11:58 pm

    👌

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