*दोस्ती का रिश्ता*

जब वक्त मिले तो पढ़ लेना,
पढ़ लेना रिश्तों की किताब
कुछ रिश्ते मिलते हैं जन्म से,
कुछ रिश्ते देता है यह समाज
किन्तु निज चुनाव से जो रिश्ता,
पुष्पित-पल्लवित होता है हृदय में,
वो रिश्ता, दोस्ती का होता है लाजवाब
_____✍️गीता

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. जब वक्त मिले तो पढ़ लेना,
    पढ़ लेना रिश्तों की किताब
    कुछ रिश्ते मिलते हैं जन्म से,
    कुछ रिश्ते देता है यह समाज
    —— बहुत सुंदर रचना, कवि गीता जी ने सहज और गहरे अर्थ को समाहित करती सुन्दर पंक्तियाँ प्रस्तुत की है।

  2. कवि गीता जी की यह कविता मानवीय अनुभवों और जीवन के सूक्ष्म निहितार्थों से जुड़ी हुई सुन्दर कविता है। भाषा में प्रवाह है, एक लय है। कवि ने कम से कम शब्दों में सारगर्भित और प्रभावपूर्ण बात कही है।

New Report

Close