दोस्त

यह शहर अनजान सा लगने लगा है
तू नहीं तोह बेगाना सा लगने लगा है

वह चाय की टपरी वह गालिया आज भी भरे है
तू नहीं तोह सब कुछ बेजान सा लगने लगा है

लोग तोह बहुत मिले तेरे जैसा दोस्त कहा है
मेरे गम मे किसी से भी लड़ने का जस्बा कौन रखता है

बिन बोले सब कुछ तू जान जाता है
अरे पेग बनाने से सब कुछ तुझी ने तोह सिखाया है

दोस्त ना हो तोह किस बात की ज़िन्दगी
होश गुम ना हो जाए तोह किस बात की तिशनगी

आज तक इस शहर मे कोई नहीं था अपना
अब तुम सब से ही तोह बनता है परिवार अपना


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Hi Everyone, I am from Kolkata.Land of culture and heritage.These are my creations.Please post your comment if you like it

12 Comments

  1. Suman Kumari - August 23, 2020, 11:56 pm

    सुन्दर

  2. Satish Pandey - August 24, 2020, 6:35 am

    बहुत सुन्दर, वाह

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 24, 2020, 7:06 am

    Sunder

  4. Geeta kumari - August 24, 2020, 8:12 am

    सुंदर रचना

  5. मोहन सिंह मानुष - August 24, 2020, 8:51 am

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  6. An Ordinary Artist - August 24, 2020, 9:46 am

    Nice

Leave a Reply