द्रोपदी

भरी सभा में कुलेल ना करता,
द्रोपदी को बीच सभा में तो ।
युध्द का प्रचंड नौबत ना आता,
दुर्योधन नारी को अगर देवी समझता।।

✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

Published in मुक्तक

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