धरती-पुत्र

मूसलाधार बारिश से जब,
बर्बाद हुई फ़सल किसान की
बदहाली मत पूछो उसकी,
बहुत बुरी हालत है भगवन्,
धरती-पुत्र महान की।
भ्रष्टाचार खूब फैल रहा,
काले धन की भी चिंता है।
मगर किसी को क्यों नहीं होती,
चिंता खेतों और खलिहान की।
अपनी फ़सलों की फ़िक्र लेकर,
हल ढूंढने निकला है हलधर
लेकिन सबको फ़िक्र लगी है,
अपने ही अभिमान की।
मूसलाधार बारिश से जब,
बर्बाद हुई फ़सल किसान की
बदहाली मत पूछो उसकी,
बहुत बुरी हालत है भगवन्,
धरती-पुत्र महान की।
भरे पेट जो सभी जनों का,
माटी से फ़सल उगाता है।
क्यों नहीं करते हो तुम चिंता,
उसके भी सम्मान की।
संपूर्ण नहीं है कोई देश,
बिन गांव और किसान के
अफ़सोस, अन्नदाता ही फांसी खाता,
कुछ चिंता कुछ फ़िक्र करो,
धरती-पुत्र की जान की।
मूसलाधार बारिश से जब,
बर्बाद हुई फ़सल किसान की
बदहाली मत पूछो उसकी,
बहुत बुरी हालत है भगवन्,
धरती-पुत्र महान की।।
____✍️गीता


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4 Comments

  1. Satish Pandey - February 22, 2021, 2:06 pm

    मूसलाधार बारिश से जब,
    बर्बाद हुई फ़सल किसान की
    बदहाली मत पूछो उसकी,
    बहुत बुरी हालत है भगवन्,
    धरती-पुत्र महान की।
    ——– किसान के जीवन से जुड़ी बहुत खूबसूरत कविता है। कवि की लेखनी की क्षमता अदभुत है। कमाल की शब्दावली है, आम जीवन की भाषा है, सुरम्य लय है। बहुत खूब गीता जी। जय हो

    • Geeta kumari - February 22, 2021, 7:46 pm

      सुन्दर समीक्षा और प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी हार्दिक आभार

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 22, 2021, 7:31 pm

    अतिसुंदर

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