धरा के सच्चे हीरे हैं

आशा भी न थी कि मिल पायेंगे
बचपन के कई साल गुजारे साथ
दशकों तक सिर्फ याद बन जायेंगे
मीठे ख्वाब फिर कहीं गुम जाएगें

बहस में पड़ने वाले कई होंगे
सामंजस्य बिठाने वाले थोड़े हैं
मतभेद को जो मिटा सके
वो ही धरा के सच्चे हीरे हैं

सुख दुख के साथी हम सब
किसी के अधिकार से दूर रहें
बड़ी मुश्किल से मिलें है यारों
आपसी तूं तूं मैं मैं से दूर रहें

सभी मुसाफिर हैं यहां जगत में
शदियों से लगा आना जाना हैं
खेल खिलौने धन थे पहले से ही
बस मेरा तेरा साथ ही पुराना है

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. आशा भी न थी कि मिल पायेंगे
    बचपन के कई साल गुजारे साथ
    दशकों तक सिर्फ याद बन जायेंगे
    मीठे ख्वाब फिर कहीं गुम जाएगें
    ___________ बचपन के साथी से दोबारा मिलने पर अपनी खुशी व्यक्त करती हुई कवि राजीव रंजन जी की बहुत ही सुंदर कविता , शिल्प और भाव का सुन्दर समन्वय

  2. “बहस में पड़ने वाले कई होंगे
    सामंजस्य बिठाने वाले थोड़े हैं
    मतभेद को जो मिटा सके
    वो ही धरा के सच्चे हीरे हैं” वाह बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

  3. आशा भी न थी कि मिल पायेंगे
    बचपन के कई साल गुजारे साथ
    दशकों तक सिर्फ याद बन जायेंगे
    मीठे ख्वाब फिर कहीं गुम जाएगें

    बहस में पड़ने वाले कई होंगे
    सामंजस्य बिठाने वाले थोड़े हैं..

    वाह बिछड़े साथी की यादों में लबरेज रूमानी कविता

    मतभेद को मिटाती हुई सुंदर प्रस्तुति

New Report

Close