धरा के सच्चे हीरे हैं

आशा भी न थी कि मिल पायेंगे
बचपन के कई साल गुजारे साथ
दशकों तक सिर्फ याद बन जायेंगे
मीठे ख्वाब फिर कहीं गुम जाएगें

बहस में पड़ने वाले कई होंगे
सामंजस्य बिठाने वाले थोड़े हैं
मतभेद को जो मिटा सके
वो ही धरा के सच्चे हीरे हैं

सुख दुख के साथी हम सब
किसी के अधिकार से दूर रहें
बड़ी मुश्किल से मिलें है यारों
आपसी तूं तूं मैं मैं से दूर रहें

सभी मुसाफिर हैं यहां जगत में
शदियों से लगा आना जाना हैं
खेल खिलौने धन थे पहले से ही
बस मेरा तेरा साथ ही पुराना है

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Responses

  1. आशा भी न थी कि मिल पायेंगे
    बचपन के कई साल गुजारे साथ
    दशकों तक सिर्फ याद बन जायेंगे
    मीठे ख्वाब फिर कहीं गुम जाएगें
    ___________ बचपन के साथी से दोबारा मिलने पर अपनी खुशी व्यक्त करती हुई कवि राजीव रंजन जी की बहुत ही सुंदर कविता , शिल्प और भाव का सुन्दर समन्वय

  2. “बहस में पड़ने वाले कई होंगे
    सामंजस्य बिठाने वाले थोड़े हैं
    मतभेद को जो मिटा सके
    वो ही धरा के सच्चे हीरे हैं” वाह बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

  3. आशा भी न थी कि मिल पायेंगे
    बचपन के कई साल गुजारे साथ
    दशकों तक सिर्फ याद बन जायेंगे
    मीठे ख्वाब फिर कहीं गुम जाएगें

    बहस में पड़ने वाले कई होंगे
    सामंजस्य बिठाने वाले थोड़े हैं..

    वाह बिछड़े साथी की यादों में लबरेज रूमानी कविता

    मतभेद को मिटाती हुई सुंदर प्रस्तुति

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