धूप

धूप,आज
कुछ, सरक आयी,
मेरे आंगन में….
और, बिखेर गई,
मुठ्ठी भर अबीर……

…. कविता मालपानी

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7 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - September 17, 2019, 11:26 pm

    वाह

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 17, 2019, 11:44 pm

    वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति

  3. Poonam singh - September 18, 2019, 11:43 am

    Good

  4. Mithilesh Rai - September 18, 2019, 7:58 pm

    सुंदर रचना

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