ध्येय ऊँचा ही रखो

बुलंद वाणी रखो
बुलंद सोच रखो
न रह किस्मत भरोसे
कर्म की ओर बढो।
ध्येय ऊँचा ही रखो
औऱ दिल साफ रखो
त्याग सब हीनता को
तेज नजरों में रखो।
भले तूफान आयें
या पड़े तेज बारिश
एक भी बूँद या कण
छूँ न पायेगा यह तन ।
न रोना है कभी भी
बुरे हालात पर अब
न जाने जोर पलटी
मार ले वक्त यह कब ।
नहीं मजबूरियों का
वश चले आज तुम पर
नहीं हो कंटकों का
बसेरा कर्मपथ पर।
नजर नित न्यूनता से
बढ़ाना उच्च पथ पर
निडर बढ़ते कदम हों
हौसला उच्च रख कर।


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2 Comments

  1. Geeta kumari - January 17, 2021, 5:21 pm

    “कर्म की ओर बढो।ध्येय ऊँचा ही रखो..
    बढ़ाना उच्च पथ पर निडर बढ़ते कदम हो”।
    कर्म पथ की ओर अग्रसर करती कवि सतीश जी बहुत ही प्रेरक पंक्तियां और उच्च विचारों की तरफ निडरता से कदम बढ़ाने को प्रेरित करती हुई बहुत उत्कृष्ट रचना । लाजवाब अभिव्यक्ति, उत्तम लेखन

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 17, 2021, 9:29 pm

    अतिसुंदर रचना

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