नई रोशनी हो

सुबह की, किरण हो नई रोशनी हो,
बहारों भरी हो, नई रोशनी हो।
जिन्हें रात भर चैन की नींद आयी,
उन्हें जगमगाती, नई रोशनी हो।
बिखरते हुये दिल अंधेरा घिरा हो,
उन्हें राह देती, नई रोशनी हो।
युवा नव दिशा में कदम को बढ़ाये,
पथों का उजाला, नई रोशनी हो।


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8 Comments

  1. Chandra Pandey - October 19, 2020, 8:31 am

    Very very nice poem

  2. Ramesh Joshi - October 19, 2020, 9:19 am

    बहुत खूब, बहुत ही लाजवाब सर

  3. MS Lohaghat - October 19, 2020, 10:08 am

    बहुत खूब, बहुत बढ़िया

  4. Piyush Joshi - October 19, 2020, 10:35 am

    बहुत खूब, अतीव सुन्दर

  5. Pragya Shukla - October 19, 2020, 10:52 am

    Nice line

  6. Geeta kumari - October 19, 2020, 12:07 pm

    कवि सतीश जी की बहुत ही खूबसूरत रचना, बहुत ही सुंदर धुन है कविता की । सुबह की किरण, नई रोशनी, वाह बहुत ही ख़ूबसूरत
    अंदाज़ और अल्फ़ाज़ से सुशोभित बहुत ही शानदार प्रस्तुति

  7. Devi Kamla - October 19, 2020, 12:14 pm

    शानदार कविता

  8. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 20, 2020, 11:32 pm

    बहुत खूब

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