नए युग की सीता

तू खुद सक्षम बन ,
ए ! नारी शक्ति!
जमाना खुद बदल जाएगा,
बैठा है हर ज़हन में रावण,
राम कब तक तुझे बचाएगा,
तू सीता बन नए युग की,
रावण खुद मर जाएगा,
ना होगी फिर से अग्नि परीक्षा,
ना आंचल पर दाग लग पाएगा,
जरा निकल तो बाहर,
हीनभाव से
जमाना शीश झुकाएगा।


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20 Comments

  1. Priyanka Kohli - September 28, 2020, 6:57 pm

    Wow kya likha h!!👏👏👏👏

  2. Praduman Amit - September 28, 2020, 8:49 pm

    💯 प्रतिशत सही कहा आपने।

  3. Anil Pandey - September 28, 2020, 10:23 pm

    ❤️ 👌

  4. Suman Kumari - September 29, 2020, 12:22 am

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति
    सच में आज इसी सीता की आवश्यकता है

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 29, 2020, 7:15 am

    अतिसुंदर

  6. मोहन सिंह मानुष - September 29, 2020, 1:45 pm

    काबिले तारीफ रचना
    आज सच में नारी को जागरूक हो जाना चाहिए उन्हें अपने आप को हीन भावनाओं से मुक्ति पाकर हर क्षेत्र में सक्षम बनना चाहिए
    बहुत ही सुंदर विचार

    • प्रतिमा चौधरी - September 29, 2020, 2:20 pm

      मेरी कविताओं की निष्पक्ष भाव से समीक्षा करने के लिए बहुत-बहुत आभार, धन्यवाद सर

  7. Deep Patel - September 29, 2020, 8:56 pm

    अतिसुंदर

  8. Priyanka Kohli - September 30, 2020, 5:56 pm

    Nice

  9. Pushpendra Kumar - September 30, 2020, 8:07 pm

    Strong message

  10. Aditya Kumar - September 30, 2020, 9:25 pm

    अद्भुत। वीर रस का प्रयोग आपको शोभा देता है।

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