नया साल

नया साल

ग़ज़ल
कुछ एेसा नया साल हो।
अपने आप मे बेमिशाल हो।
महगी थी यह वर्ष बीत गई,
कुछ सस्ता नया साल हो।
कुछ तो यादें रहेंगें नये नये,
कुछ सपनों का उडता गुलाल हो।
नई गीत हो ,नया ग़ज़ल हो,
नये सरगम पे नया ताल हो।
रंगीन – ए- महपिल में योगेन्द्र,
कुछ उम्मिदों का नया साल हो
योगेन्द्र कुमार निषाद
घरघोड़ा (छ़ग़)


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

कहानी – हर साल की

नव

नव

Naya saal

नया साल

नया साल

11 Comments

  1. Ritu Soni - December 27, 2017, 5:21 pm

    nice gazal

  2. Dalend - December 27, 2017, 9:33 pm

    bahu achha gajal h bhaiya

  3. Umesh - December 29, 2017, 2:37 pm

    Nice gajal

  4. Yogi Nishad - December 31, 2017, 12:21 pm

    धन्यवाद , आप सभी को मेरे रचना ” नया साल “को वोट करने के लिये ।

  5. Abhishek kumar - November 27, 2019, 7:21 am

    Wow

Leave a Reply