“नववर्ष हो इतना सबल”

नववर्ष हो इतना सबल
ना पीर चारों ओर हो,
जिधर भी उठे नजर
सर्वत्र पुष्प ही पुष्प हो..
यह लेखनी अविराम हो,
हर पंक्ति में ऐसे भाव हों…
जाग जाए यह जमीं और
आसमां झुक जाए,
लेखनी हो तरुण-सी
ऐसा नववर्ष आए…
कोरोना की ना मार हो,
फूला-फला संसार हो…
दुर्गम हो, चाहे दुर्लभ हो,
हर पथ मानव को सलभ हो…
युवा हो कर्मठ और हाथ में
उनके पतवार हो,
ना डूबे कभी बहती रहे ऐसी
सुंदर नाव हो…
२०२० तो जलमग्न हो गया,
२०२१ सजकर आ गया…
सबके मनोरथ पूर्ण हो
सबका सुखी संसार हो…


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9 Comments

  1. Geeta kumari - January 1, 2021, 7:31 am

    नव वर्ष पर बहुत सुंदर कविता ।
    नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

    • Pragya Shukla - January 1, 2021, 4:03 pm

      धन्यवाद दी…
      मेरा हौसला बढ़ाने के लिए

  2. Anu Singla - January 1, 2021, 8:08 am

    बहुत खूब लिखा है आपने
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

    • Pragya Shukla - January 1, 2021, 4:02 pm

      धन्यवाद आपका अनु..
      आपकी टिप्पणी ही मेरी प्रेरणा है

  3. Sandeep Kala - January 1, 2021, 12:17 pm

    बहुत ही सुंदर पंक्तियां लिखी हैं, नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

    • Pragya Shukla - January 1, 2021, 4:02 pm

      आपको पसंद आई यह मेरे लिए बड़ी बात है

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 1, 2021, 7:36 pm

    बहुत खूब

  5. vivek singhal - January 1, 2021, 8:42 pm

    बहुत ही सुंदर और सार्थक रचना..
    शिल्प, कथ्य और भाषा शैली अतिउत्तम है

  6. Satish Pandey - January 4, 2021, 4:13 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

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