नव-प्रभात

कनक तश्तरी सा आलोकित भानु
लुटा रहा है स्वर्ण रश्मियाँ ।
दूर-दूर तक बिखरा सोना,
हर पत्ती हर डाली -डाली
रौशन हुआ है हर कोना-कोना।
देखो नव प्रभात हो रहा है,
जागो, अब नहीं है सोना॥
_____✍गीता

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