“नाम” में प्रभू के हम, मस्त हो के जी रहे ……! (गीत)

नाम साधना के अभ्यास के दौरान उभरा हुआ यह गीत प्रस्तुत करने बहुत ख़ुशी महसूस कर रहा हूँ  ..!

“नाम”  में  प्रभू  के  हम,   मस्त  हो  के  जी  रहे ……! (गीत)

 

हम  है  भक्त  “नाम”  के,   हम  तो  मस्त  हो  लिए,

“नाम”  में  प्रभू  के  हम,   विश्वमन  में  खो  लिए,

“नाम”  में  प्रभू  के  हम,   मस्त  हो  के  जी  रहे ……!

“नाम” में   प्रभु  के  हम ,  मस्त  हो  यूं   गा  रहे ……!

 

चिंता  कुछ  हमें  नहीं,   ना  हैं  हम  अस्वस्थ भी,

प्रभू  के  भेजे  काज  हैं,   और  है  पास  वक्त  भी,

प्रेम दृष्टि   से  ये  सब,   जग  निहारते  चले,

हम  तो  मस्त  हो  लिए,

“नाम”  में  प्रभू  के  हम,   मस्त  हो  के  जी  रहे……!

 

भक्ति  में  ये  शान्ति  और  मन  में  है  आनंद  सा,

प्रभू  के  “नाम”  का  नशा,   जग  लगे  है  स्वर्ग  सा,

देहबुद्धि  के  परे,   आत्मबुद्धि  से  जुटे,

देहबुद्धि  के  परे,   आत्म ज्ञान  में  रमे,

“नाम”  में  प्रभू  के  हम,   मस्त  हो  के  जी  रहे……!

 

विश्वमन  ही  शक्ति  है,   विश्वमन  ही  ज्ञान  है,

सूक्ष्म  से  अनंत  तक  विश्वमन  ही  व्याप्त  है,

सत्य  शिवम्  सुन्दरम,  विश्वमन  ही  तो  है,

विश्वमन  का  स्पर्श  हम,   भक्ति  में  ये  पा  रहे ….!

 

हम  तो  मस्त  हो  लिए,

“नाम”  में  प्रभू  के  हम,   मस्त  हो  के  जी  रहे……!

“नाम”  में  प्रभू  के  हम ,  मस्त  हो  यूं   गा  रहे…..!

 

” विश्व नन्द”

 

(This “bhaktigeet” on Naam Sadhana , had got composed inspired by the beautiful lovely tune of the song ” Ham hain rahi pyar ke” from film “Nau Do Gyarah (1957)” and may kindly be considered as my humble tribute to the great revered Shri Sachin Dev Burman da.)

 

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